नई दिल्ली: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में तेजी से अपनी पहचान बना रहा है, लेकिन चीन की नई रणनीतियों ने भारतीय उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। चीन द्वारा सप्लाई चेन पर लगाई जा रही सख्त बंदिशों से भारत के ग्लोबल इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की राह में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं। ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, बढ़ती चुनौतियों के बीच भारतीय कंपनियों ने अब सरकार से हस्तक्षेप और सहायता की मांग की है।
चीन ने अपनी सप्लाई चेन पर पकड़ मजबूत करने के लिए अप्रैल में कई नई नियामकीय बंदिशें लागू की थीं। इसके साथ ही, चीन से बाहर मैन्युफैक्चरिंग शिफ्ट करने वाली कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जवाबदेह ठहराने की व्यवस्था भी की गई है। माना जा रहा है कि इस कदम का असर आईफोन निर्माता Apple Inc. जैसे बड़े ब्रांड्स और भारत में उनके सप्लायर्स पर पड़ सकता है। वहीं, चीनी कंपनियों के साथ जॉइंट वेंचर की तैयारी कर रही भारतीय कंपनियों को भी इससे बड़ा झटका लगने की आशंका है।
चीन की नई चाल से बढ़ी चिंता
इस मामले पर Apple Inc. ने फिलहाल कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। सूत्रों के मुताबिक, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री ने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उद्योग का कहना है कि चीन द्वारा लगाई गई नई बंदिशों से सप्लाई चेन की स्थिरता, निवेश और एक्सपोर्ट ग्रोथ पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। एक सरकारी अधिकारी ने भी माना कि सरकार इस मुद्दे से वाकिफ है और इंडस्ट्री से चर्चा के बाद हरसंभव कदम उठाए जाएंगे।
उद्योग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि भारत धीरे-धीरे अपनी सप्लाई चेन मजबूत कर रहा है और आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग जारी रखने और एक्सपोर्ट बढ़ाने के लिए अभी भी चीन से कंपोनेंट्स, एसेंबली और कैपिटल इक्विपमेंट का आयात बेहद जरूरी है। लेकिन चीन ने इन क्षेत्रों में कई नई पाबंदियां लगा दी हैं। बताया जा रहा है कि जिन कंपनियों ने अपनी सप्लाई चेन भारत में शिफ्ट कर दी है या ऐसा करने की योजना बना रही हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है।

